होली की हार्दिक शुभकामनायें!!! होली, जिसे ‘रंगों का त्योहार कहते हैं

होली की हार्दिक शुभकामनायें!!! होली, जिसे ‘रंगों का त्योहार कहते हैं

हिन्दी केलिन्डर के हिसाब, होलिका दहन हर वर्ष फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि को होती है। इस वर्ष होलिका दहन 28 मार्च दिन रविवार को हो रहा है। त्यौहार के दिन लोग अपने गिले शिकवे को मिटाकर एक दूसरे के हो जाते है बुराई पर अच्छाई की जीत होती है, होली एक पर्व के रूप में मनाया जाने वाले इस त्यौहार के पीछे कही प्रभु से जुडी हुई कहानी है ।

होली क्यों मानते है हिन्दू धरम में होलिका की कहानी दहन की कहानी आखिर क्या है

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होलिका और हिरण्यकश्यप की बातचीत – हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका से पूछा, जो अग्नि से विलुप्त थी, उसकी गोद में प्रहलाद के साथ अग्नि की एक चिता पर बैठना था। उनकी भावना प्रहलाद की मित्यु करनी थी। लेकिन उनकी योजना प्रहलाद के रूप में नहीं चली, जैसे ही होलिका ने उन्हें अपनी गोदी में बिठाया परलाद ने उसी समय भगवान विष्णु के नाम का पाठ करने लग गए , और वो सुरक्षित थे, लेकिन होलिका जलकर राख हो गई। इसके बाद, भगवान विष्णु ने हिरण्यकश्यप का वध कर दिया था।

होली तोहार रंगो का हिस्सा कैसे बने?

यह तोहार भगवान कृष्ण जो की विष्णु के अवतार है , कि भगवान श्री कृष्ण जी रंगों के साथ होली मनाते थे उन्हें ये बहुत ही लोकप्रिय तोहार लगता था ,वह वृंदावन और गोकुल में अपने सभी दोस्तों के साथ होली खेलते थे। गाँव भर में मनोरंजन किया करते थे,और इस तरह इसे एक सामुदायिक कार्यक्रम बना दिया। यही वजह है कि आज तक वृंदावन में होली का तोहार बड़े ही धूम धाम से मानते है।

होली एक फागुन त्योहार है जो की हर साल ठण्ड को अलविदा कहता है। कुछ हिस्सों में उत्सव फागुन फसल के साथ भी जुड़े हुए हैं। इस वजह से, होली को ‘फागुन महोत्सव’ और ‘किसान महोत्सव’ के रूप में आज भी जाना जाता है।

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