आत्मा कितनी बार किस युग में पैदा हुई थी

आत्मा कितनी बार किस युग में पैदा हुई थी

हमारे कई विद्वानों के अनुसार चार युग का विवरण किया गया है सत्ययुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग, कलयुग ये चार युग हैं, समस्त चतुर्युग एक से ही होते हैं। आरम्भ सत्ययुग से होता है अंत में कलयुग होता है। किसी भी जन्म में अपनी आज़ादी से किये गये कर्मों के मुताबिक आत्मा अगला शरीर धारण करती है। हिन्दू धर्म के सर्वोच्च ग्रन्थ हैं, जो पूर्णत: अपरिवर्तनीय हैं, अर्थात् किसी भी युग में इनमे कोई बदलाव नही किया जा सकता। ब्रह्माजी कलयुग में जिस प्रकार सृष्टि का आरम्भ करते हैं, वैसे ही कलयुग में उसका उपसंहार करते हैं। सतयुग, द्वापरयुग, कलयुग हर युग में कोई न कोई ईश्वर जन्म जरूर लेते है ऐसा आज भी लोग समझते है, लेकिन क्या आपको पता है कि किस युग में इंसान कितने जन्म लेता है। इसलिए आज हम आपको सभी युगों के बारे में कुछ ऐसी बातें जो आपने कभी सुनी नहीं होंगी।

सत्ययुग:-क्या है और किस किस भगवान का अवतार था इससे युग में

ये युग भगवान श्री भोलेनेथ ब्रह्मा, विष्णु का जन्म एक रहस्य है जो की सतयुग में हुआ था तीनों के जन्म की कुछ महान कथाएं वेद और पुराणों में अलग-अलग हैं। उनके अलग-अलग होने का कारण यह है कि जो शिव को मानते हैं, वे शिव को ही केंद्र में रखकर अपना दर्शन गढ़ते हैं और जो विष्णु को मानते हैं, वे विष्णु को केंद्र में रखते हैं। लेकिन सभी पुराण इस बात पर तो सहमत हैं कि ‍शिव ने ब्रह्मा के पुत्र दक्ष की पुत्री सती और विष्णु ने ब्रह्मा के पुत्र भृगु की पुत्री लक्ष्मी से विवाह किया था। ऐसे में सभी तरह की अलंकारिक और श्रृंगारिक कथाओं के रहस्य को समझना जरूरी है। इससे समय में लोगो की ाइयो लग भाग 17,28,000 वर्ष है।

त्रेतायुग में अवतार कौन बने :-

येहै युग श्री राम जी का था जिसमे उन्होंने अपने पिता के कहने पर अपना जीवन सब कुछ होने के बावजूद भी १४ वर्ष वनवास में रखा कई संतो का मानना है की श्री राम बागवान विशु जी के अवतार है और उन्होंने रवां जैसे राक्षसी का वध करने के लिए इससे युग में श्री राम अवतार में जन्म लिया ह। राम लक्मण भरत सत्रुघन ये चारो ही विशु जी के अवतार है, और साथ ही यहाँ हनुमान जी का जीकर है विश्व भर में राम भक्त हनुमान जी को ही माना गया ह। इस युग की पूर्ण आयु अर्थात् कालावधि – 8.64,000 वर्ष होती है

द्वापर युग की आगमन:-

ये युग श्री भगवान कृष्ण जी के ऊपर गठित है, इसमें कोरवो और पांडवो का कैसे और किस प्रकार से उधर किया गया,श्री कृष्णा जी ने एक सारथि की तरह अर्जुन को अपनी निति को मद्दे नजर रखते हुए पारिवारिक दुविधाओं गुरुओ व आने अपने भाइयो को युद भूमि में जीवन का असली मार्ग दरसक बनकर उनके समथ खड़े रहे और नया और अन्ये के मार्ग दर्शन कराय। और आखिर में पांडवो की जीत हुई। और इससे युग में 432,000 साल आयु थी।

कलयुग का वर्णन:-

कलयुग में धर्म का निरादर होगा लोगो की जरुरत सिर्फ पैसा होगा सब रिश्ते नातो को एक ही नजर से देखा जायेगा इंसान की सोच सिर्फ पैसे से सुरु होगी और वही ख़तम, कलयुग के अनुसार लोगो की सोच हमेशा गलत की भावना से हो गई अन्याय करने वाला और अन्याय सहने वाला दोनों ही दोषी होंगें इसमें लोग अपने स्वार्थ के लिए किसी की जान लेने को भी अपने जीवन में कुशहली 0का अवसर समझेंगे, इस युग में धर्म तो होगा लकिन उसके पीछे भी लोगो की भावना में स्वार्थ होगा इससे लिए चारो युगो में से इससे युग में मनुष्ये की ाइयो kam होगी और कुछ विद्वानों का कहना की भगवान विशु हर युगो की तरह इससे युग का अंत करने के लिए कल्कि का अवतार लेंगे और इस युग की पूर्ण आयु अर्थात् कालावधि मनुष्ये की उम्र १०० वर्ष की है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *